मुझसे न होगा अब् तुझको भुला पाना….
अपने दिल् पर् लिखे तेरे नाम् को मिटा पाना
तू सोचती है तो कर् के देख् ले येह् कोशिश्
तेरे दिल् पर् लिखा है मेरा नाम् और् भी गहरा….
मुझसे न होगा अब् यू अश्क़् बहाना…
तेरी याद् मै रो रो के खुद् को भुला पाना
तू कर् सकती है तो रोक् ले अपने आन्सू
तेरी आन्खू मेइन् बसते है मेरी ही येह् आन्सू…
मुझसे ना होगा अब् जीना यू तनहा
तू कही और् मैन् यहान् तेरे बिना
तू कर् सकती है तो रह् ले उस् पार् अकेले
तेरी बस्ती के हर् एक् घर् मेइन् बसती हैं मेरी यादें….
मुझसे ना होगा अब् तुम् बिन् अकेले चल् पाना
दो कदम् भी कहि चले थै हम् तेरे बगैर्
तू कर् सकती है तो जा आज़मा ले मुझ् को
हर् राह् पर् मिलेंगे पेहले से ही मेरे कदमो के निशान् मौज़ूद्…
Recent Comments