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बावरा मन के लिए टिप्पणियाँ
https://rakeshkumar.wordpress.com
और बंजारे सपने
Sun, 05 May 2024 16:05:30 +0000
hourly
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https://wordpress.com/
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OMPRAKASH JAILIA द्धारा कोई दीवाना कहता है पर टिप्पणी
https://rakeshkumar.wordpress.com/2007/04/03/koi-deewana-kahta-hai/#comment-35790
Sun, 05 May 2024 16:05:30 +0000
https://rakesh.in/2007/04/03/koi-deewana-kahta-hai/#comment-35790
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मै तुझसे दूर कैसा हू तू मुझसे दूर कैसी है
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है
मोहबत्त एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूं है
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है
मै जब भी तेज़ चलता हू नज़ारे छूट जाते है
कोई जब रूप गढ़ता हू तो सांचे टूट जाते है
मै रोता हू तो आकर लोग कन्धा थपथपाते है
मै हँसता हू तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते है
समंदर पीर का अन्दर लेकिन रो नहीं सकता
ये आसूं प्यार का मोती इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता
भ्रमर कोई कुम्दनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोह्बत्त का
मै किस्से को हक्कीकत में बदल बैठा तो हंगामा
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेडे सह नहीं पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मै बह नहीं पाया
अधूरा अनसुना ही रह गया ये प्यार का किस्सा
कभी तू सुन नहीं पाई कभी मै कह नहीं पाया । ]]>
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OMPRAKASH JAILIA द्धारा कोई दीवाना कहता है पर टिप्पणी
https://rakeshkumar.wordpress.com/2007/04/03/koi-deewana-kahta-hai/#comment-35789
Sun, 05 May 2024 16:03:34 +0000
https://rakesh.in/2007/04/03/koi-deewana-kahta-hai/#comment-35789
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मै तुझसे दूर कैसा हू तू मुझसे दूर कैसी है
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है
मोहबत्त एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूं है
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है
मै जब भी तेज़ चलता हू नज़ारे छूट जाते है
कोई जब रूप गढ़ता हू तो सांचे टूट जाते है
मै रोता हू तो आकर लोग कन्धा थपथपाते है
मै हँसता हू तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते है
समंदर पीर का अन्दर लेकिन रो नहीं सकता
ये आसूं प्यार का मोती इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता
भ्रमर कोई कुम्दनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोह्बत्त का
मै किस्से को हक्कीकत में बदल बैठा तो हंगामा
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेडे सह नहीं पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मै बह नहीं पाया
अधूरा अनसुना ही रह गया ये प्यार का किस्सा
कभी तू सुन नहीं पाई कभी मै कह नहीं पाया ।
…..ओमप्रकाश जैलिया भीलवाड़ा राजस्थान….✍️ ]]>
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सौरभ कुमार द्धारा Ek Din nadi ke teere [ Bhojpuri Nirgun Song with Lyrics and Meaning ] पर टिप्पणी
https://rakeshkumar.wordpress.com/2013/01/14/ek-din-nadi-ke-teere-bhojpuri-nirgun-song-with-lyrics-and-meaning/#comment-35211
Sun, 11 Apr 2021 07:44:12 +0000
https://rakeshkumar.wordpress.com/?p=478#comment-35211
इस नश्वर और क्षणिक संसार के प्रति आसक्ति , मोह से उत्पन्न व्यर्थ कर्म और फिर कर्मों से बंध जाने वाला इस भौतिक शरीर का हृदय विदारक चित्रण है। जीवन का अंतिम सत्य और कर्मों की अमरता बड़े ही मनोवैज्ञानिक तरीके से इस गीत में पिरोया गया है। गीत बड़े हैं फैंटेसी तरीके से भौतिकवादी जीवन का अतिक्रमण कर परम सत्य का दर्शन करा देती है।
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अभय वशिष्ठ द्धारा Ek Din nadi ke teere [ Bhojpuri Nirgun Song with Lyrics and Meaning ] पर टिप्पणी
https://rakeshkumar.wordpress.com/2013/01/14/ek-din-nadi-ke-teere-bhojpuri-nirgun-song-with-lyrics-and-meaning/#comment-35171
Fri, 01 Jan 2021 13:50:38 +0000
https://rakeshkumar.wordpress.com/?p=478#comment-35171
शब्द नहीं है। सत्य को जीता गीत। यही अंत है और यही हर किसी का होना है। जीवन की राह पर फिर कर्तव्य ही बचता है।
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शान से चलो !! | The Indian Stammering Association द्धारा शान से चलो !! पर टिप्पणी
https://rakeshkumar.wordpress.com/2009/05/21/%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a5%8b/#comment-35108
Mon, 06 Jul 2020 12:40:42 +0000
https://rakesh.in/?p=400#comment-35108
[…] ! चल दिया है तो फिर शान से चलो !! Original Post: Click Here Post Views: 3 Share […]
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Vikash dubey द्धारा Ek Din nadi ke teere [ Bhojpuri Nirgun Song with Lyrics and Meaning ] पर टिप्पणी
https://rakeshkumar.wordpress.com/2013/01/14/ek-din-nadi-ke-teere-bhojpuri-nirgun-song-with-lyrics-and-meaning/#comment-34983
Tue, 13 Aug 2019 03:37:11 +0000
https://rakeshkumar.wordpress.com/?p=478#comment-34983
Jindagi ke sach se wakif karna
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Romantic Whatsapp Status द्धारा Lyrics: Maula Mere – Anwar पर टिप्पणी
https://rakeshkumar.wordpress.com/2006/11/23/lyrics-maula-mere-anwar/#comment-34883
Wed, 10 Apr 2019 21:11:07 +0000
https://rakeshkumar.wordpress.com/2006/11/23/lyrics-maula-mere-anwar/#comment-34883
you are really a just right webmaster. The site loading pace is amazing.
It kind of feels that you’re doing any unique trick.
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मै तुझसे दूर कैसा हू तू मुझसे दूर कैसी है
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है
मोहबत्त एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूं है
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है
मै जब भी तेज़ चलता हू नज़ारे छूट जाते है
कोई जब रूप गढ़ता हू तो सांचे टूट जाते है
मै रोता हू तो आकर लोग कन्धा थपथपाते है
मै हँसता हू तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते है
समंदर पीर का अन्दर लेकिन रो नहीं सकता
ये आसूं प्यार का मोती इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता
भ्रमर कोई कुम्दनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोह्बत्त का
मै किस्से को हक्कीकत में बदल बैठा तो हंगामा
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेडे सह नहीं पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मै बह नहीं पाया
अधूरा अनसुना ही रह गया ये प्यार का किस्सा
कभी तू सुन नहीं पाई कभी मै कह नहीं पाया । ]]>
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मै तुझसे दूर कैसा हू तू मुझसे दूर कैसी है
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है
मोहबत्त एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूं है
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है
मै जब भी तेज़ चलता हू नज़ारे छूट जाते है
कोई जब रूप गढ़ता हू तो सांचे टूट जाते है
मै रोता हू तो आकर लोग कन्धा थपथपाते है
मै हँसता हू तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते है
समंदर पीर का अन्दर लेकिन रो नहीं सकता
ये आसूं प्यार का मोती इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता
भ्रमर कोई कुम्दनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोह्बत्त का
मै किस्से को हक्कीकत में बदल बैठा तो हंगामा
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेडे सह नहीं पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मै बह नहीं पाया
अधूरा अनसुना ही रह गया ये प्यार का किस्सा
कभी तू सुन नहीं पाई कभी मै कह नहीं पाया ।
…..ओमप्रकाश जैलिया भीलवाड़ा राजस्थान….✍️ ]]>
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